

गोंदल्पुरा/ड़कागांव : क्षेत्र में कोयला परियोजनाओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया है। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के नेतृत्व में एनटीपीसी विस्थापन, मुआवजा, कट-ऑफ तिथि और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग को लेकर कंपनियों के खिलाफ एक बार फिर आवाज बुलंद की गई। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू गोंदलपुरा और चेपाखुर्द गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ जनसंवाद किया। गोंदलपुरा में आयोजित जनसंवाद के दौरान ग्रामीणों में कोल कंपनियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी जमीन कोल कंपनियों को नहीं देंगे। उनका आरोप है कि कंपनी के इशारे पर पुलिस द्वारा उन पर लगभग 40 फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी भी ग्रामसभा की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई है और सभी ग्रामसभाएं फर्जी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे कोल परियोजनाओं के आवंटन को रद्द करने की मांग को लेकर पिछले 1180 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत कई उच्च अधिकारियों को आवेदन सौंपा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी जमीन बहुफसलीय है, जहां धान,गेहूं गन्ना, सब्जियां, दलहन और तिलहन की खेती होती है। इसके अलावा यह क्षेत्र हाथियों का कॉरिडोर है और यहां जैव विविधता से भरपूर जंगल मौजूद हैं। उनका कहना है कि परियोजनाओं के शुरू होने से उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बहुफसलीय जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, तो फिर यह कानून कंपनियों पर लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। रैयतो ने यह भी सवाल उठाया की गैर मजरुआ भूमि का झारखण्ड सरकार ने मुआवजा क्यों लिया जबकि कोई भी किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं है l इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों का एक लिखित ज्ञापन कांग्रेस प्रभारी और वित्त मंत्री को सौंपा। गोंदलपुरा के बाद प्रतिनिधिमंडल चेपाखुर्द गांव पहुंची, जहां बारिश के कारण अधिक लोग नहीं पहुँच पाए फिर भी जितने लोग पहुचे थे जनसंवाद में शामिल हुए जिसमे रैयत रियासत हसन ने मुआवजा कम मिलने और एनटीपीसी द्वारा निर्धारित 2016 की कट-ऑफ तिथि का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह तिथि विस्थापितों के हित में नहीं है और इसे हटाया जाना चाहिए। गैर मजरुआ भूमि का कंपनी मुआवजा नहीं दे रही है इसे लेकर किसान संगर्ष समिति के तेजन महतो.,रंजन कुमार ,ज्ञानी कुमार,संतोष कुमार ने कांग्रेस महासचिव को एक ज्ञापन सौपा l
जनसंवाद के दौरान कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की आवाज को विधानसभा से लेकर लोकसभा और राज्यसभा तक उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी का अधिकार छीना नहीं जाएगा और पार्टी इस लड़ाई में पूरी तरह ग्रामीणों के साथ है। वहीं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासन को कंपनियों के बजाय ग्रामीणों के हित में काम करना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखकर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ग्रामसभा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पांच वकीलों , पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का सुझाव भी दिया। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने कहा कि वे भूमि अधिग्रहण कानून 2013 और विस्थापन से जुड़े मुद्दों पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि कंपनियां विकास के नाम पर विनाश कर रही हैं और ग्रामसभाएं फर्जी तरीके से कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर ग्रामीणों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
इस मौके पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे, जिनमें महाराष्ट्र के विधायक भूपेंद्र मरावी, राजीव रंजन, नवीन कुमार समेत दर्जनों लोग शामिल थे।
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